من المستبعد أن ينهي أي اتفاق تجاري بين الصين والولايات المتحدة - إذا أبرم فعلا - التنافس بين هذين العملاقين الاقتصاديين.
وكان البلدان قد خاضا في العام الماضي حربا تجارية أدت إلى الإضرار بالاقتصاد العالمي.
ولكن كثيرين يعتقدون بأن الخلافات بين البلدين تتجاوز النطاق التجاري، بل تمثل صراعا على الهيمنة بين نظرتين مختلفتين للعالم.
فإذا توصل الطرفان إلى اتفاق تجاري أم لم يتوصلا إليه، من المرجح أن يتفاقم الصراع بين الطرفين ويصبح أكثر تعقيدا واستعصاء عن الحل.
يقول مايكل هيرسون، مدير الشأن الآسيوي في شركة "أوراسيا غروب" الاستشارية، "ولجنا واقعا جديدا تفاقم فيه التنافس الجيوسياسي بين الصين والولايات المتحدة وأصبح أكثر جلاء".
ويمضي للقول "قد يخفف اتفاق تجاري جانبا واحدا من الصراع بين الصين والولايات المتحدة، ولكن لفترة محدودة فقط وبتأثير محدود".
يقول محللون إن المرحلة القادمة من التنافس بين الصين والولايات المتحدة ستخاض في قطاع التكنولوجيا الحيوي، إذ سيحاول الطرفان تثبيت موقفهما على أنهما القوة الرائدة في هذا المجال.
وكانت القضايا المتعلقة بنقل التكنولوجيا أخذت حيزا كبيرا في المفاوضات التجارية التي جرت بين أكبر اقتصادين في العالم في الأشهر الأخيرة.
يقول ستيفن أولسون، الباحث لدى مؤسسة هينريش الاستشارية التجارية العالمية، "تقر كل الدول - وهي محقة في ذلك - بأن ازدهارها وثرائها وأمنها الاقتصادي وأمنها العسكري ستكون كلها مرتبطة باحتفاظها على الغلبة التكنولوجية".
المعركة التكنولوجية
يقول عديدون إن المعركة التكنولوجية بين الصين والولايات المتحدة قد بدأت فعلا، وأن عملاق التكنولوجيا الصينية - شركة هواوي - تقع في قلب هذه المعركة.
تتعرض هواوي للكثير من التمحيص الدولي في الآونة الأخيرة، إذ اثارت الولايات المتحدة وغيرها من الدول الغربية مخاوف أمنية حول منتجاتها.
فقد منع الأمريكيون وكالاتهم الاتحادية من استخدام منتجات هواوي، وحضوا حلفائهم على الحذو حذوهم.
ومنعت استراليا ونيوزيلندا استخدام معدات هواوي في تأسيس شبكات الجيل الخامس للاتصالات المحمولة لديهما.
ولكن هواوي تصر على أنها مستقلة تماما عن الحكومة الصينية. وقال مؤسسها رين رينغفي لبي بي سي في شباط / فبراير الماضي إن شركته لن تتورط أبدا في نشاطات تجسسية.
ووصل النزاع ذروته في كانون الأول / ديسمبر الماضي، عندما ألقي القبض في كندا على ابنة رين وعندما رفعت هواوي دعوى قضائية ضد الحكومة الأمريكية.
وشنت هواوي حملة علاقات عامة في الولايات المتحدة، إذ نشرت اعلانا في صحيفة وول ستريت جورنال قالت فيه إن على الأمريكيين "عدم تصديق كل ما يسمعون".
يقول هيرسون إن "عبارة الحرب الباردة تستخدم أكثر مما ينبغي فيما يتعلق بالتوتر بين الصين والولايات المتحدة، ولكنها عبارة دقيقة لوصف التنافس التكنولوجي بين الجانبين".
ويضيف أن الخلاف حول شركو هواوي "يعد تعبيرا عن هذا التنافس الجيوسياسي المتصاعد".
ويقول، "إن حل هذا التنافس أكثر تعقيدا من حل الخلافات التجارية البحتة".
كيف وصلنا إلى هنا؟
ما لبث قلق الأمريكيين يزداد إزاء الصين في السنوات الأخيرة، جنبا إلى جنب مع تصاعد نفوذ الصين حول العالم.
وساهمت مبادرة الحزام والطريق الصينية ومبادرة "صنع في الصين 2025"، علاوة على نمو نفوذ شركات صينية مثل هواوي وعلي بابا، في تعزيز هذا القلق.
ولخص نائب الرئيس الأمريكي مايك بنس مشاعر ادارته في خطاب ألقاه في تشرين الأول / أكتوبر الماضي قال فيه إن الصين اختارت طريق "العدوان الاقتصادي" عوضا عن "الشراكة".
وكانت الآمال الغربية بأن الصين ستعتنق النموذج الغربي قد خابت واستبدلت باعتراف بأن الاقتصاد الصيني تمكن من الازدهار جنبا إلى جنب مع النظام المدار من قبل الحكومة وليس العكس.
يقول أندرو غيلهولم، مدير شعبة تحليل الصين لدى معهد "كونترول ريسكس" الاستشاري، "أصبحت الصين أكثر وضوحا بكثير فيما يتعلق بطموحاتها في السنوات الأخيرة".
"ولذا لم يعد أحد يتوقع أن تتبع الصين النموذج الليبرالي الديمقراطي الغربي أو أن تنحو نحو اقتصاد السوق كما كان كثيرون يأملون قبل بضعة سنوات".
فنظاماهما السياسيان المختلفان جعلهما شريكان لا يمكن التوافق معهما في النظام الاقتصادي العالمي.
يقول أولسن، "ما نراه الآن هو احتكاك بين اقتصاديات السوق الحرة ومبادئ واشنطن واقتصاد جبار متطور تكنولوجيا ومدار مركزيا ويدير اللعبة بشروط مختلفة تماما".
ما الذي سيحدث الآن؟
بينما يزداد سباق التكنولوجيا سرعة، يتوقع محللون أن تواصل الولايات المتحدة تطبيق اجراءات لا علاقة لها بالتعريفات التجارية لمواجهة الصين.
ويقول هؤلاء إن تقييد الاستثمارات الصينية في الولايات المتحدة وتحديد قدرة الشركات الأمريكية على تصدير التقنيات إلى الصين ومواصلة الضغط على الشركات الصينية كلها أساليب قد تؤتي أكلها.
ويقول هيرسون، "الاجراءات الخالية من التعرفات لا تسترع انتباه الأسواق، ربما لأن تأثيرها صعب التقدير، ولكن يمكن أن يكون لها تأثير بعيد المدى".
قد يكون من شأن قانون أصدرته الولايات المتحدة في العام الماضي تسهيل هذه العملية.
فقد عزز هذا القانون سلطات الحكومة الأمريكية لإعادة النظر - ومنع - الصفقات التجارية المتعلقة بالشركات الأجنبية عن طريق توسيع نماذج الصفقات التي يمكن للجنة الاستثمارات الأمريكية مراجعتها.
يذكر أن مهمة هذه اللجنة تدقيق الاستثمارات الأجنبية للتحقق من احتمال تشكيلها تهديد للأمن الوطني الأمريكي.
وكانت صفقة كبيرة تتعلق ببيع ببيع شركة مونيغرام الأمريكية لتحويل الأموال إلى شركة أنت فينانشيال التابعة لشركة علي بابا الصينية قد انهارت بعد أن أخفقت الشركتان في الحصول على موافقة لجنة تدقيق الاستثمارات الأجنبية - وذلك قبل صدور القانون الأخير.
هل يؤشر هذا إلى مسار العلاقات الصينية الأمريكية في المستقبل؟
بينما تزداد حمى السباق التكنولوجي، يتوقع محللون أن تواصل الولايات المتحدة اجراءات خالية من التعرفات لمواجهة الصين.
ويقول هؤلاء إن الأمريكيين قد يستخدمون عددا من الأدوات في هذا المجال، منها تقييد الاستثمارات الصينية في الولايات المتحدة وتحديد قابلية الشركات الأمريكية على تصدير التكنولوجيا إلى الصين ومضاعفة الضغوط على الشركات الصينية.
ويقول هيرسون، "الإجراءات التي لا تتضمن تعرفات لا تسترع الانتباه في أسواق المال كالتي تسترعيها الاجراءات التي تتضمن تعرفات، ربما لأن تأثيراتها ليست يسيرة التقدير، ولكن قد يكون لهذه الاجراءات تأثيرات بعيدة المدى".
Wednesday, April 24, 2019
Thursday, April 18, 2019
भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीवीएल नरसिम्हा राव पर जूता फेंका गया
नई दिल्ली. भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक व्यक्ति ने जूता फेंक दिया। यह पहली बार है जब भाजपा कार्यालय में ऐसी कोई घटना हुई है। बताया जा रहा है कि जीवीएल प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर बात कर रहे थे।
जीवीएल ने घटना के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं रोकी और पत्रकारों से बैठे रहने को कहा। उन्होंने कहा कि हमलावर ने कांग्रेस की मानसिकता दर्शाई है। इस दौरान भाजपा के महासचिव भूपेंद्र यादव भी मंच पर मौजूद थे।
जूता फेंकने वाले ने खुद को व्हिसल ब्लोअर बताया
घटना के बाद लोगों ने जूता फेंकने वाले व्यक्ति को पकड़ लिया और बाहर ले गए। उसकी पहचान कानपुर के डॉ. शक्ति भार्गव के रूप में हुई है। सूत्रों के मुताबिक, व्यक्ति ने बताया कि वह भोपाल से मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को टिकट दिए जाने से नाराज था। उसे आईपी एस्टेट थाना ले जाया गया है, जहां पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जूता फेंकने वाले व्यक्ति ने खुद को कानपुर का व्हिसल ब्लोअर बताया है। उसने अपनी फेसबुक पोस्ट में 'लाल इमली मिल्स' के कर्मचरियों और पीएसयू कर्मचारियों की आत्महत्या का मामला उठाया था। इसके लिए उसने सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
मां और भाइयों से चल रहा है संपत्ति विवाद
बताया जाता है कि कानपुर के सिविल लाइंस में डॉ. भार्गव का अस्पताल है। भार्गव का उनकी मां दया भार्गव और भाइयों से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। वह पत्नी डॉ. शिखा भार्गव के साथ अलग रहते हैं। उनकी मां ने बहू और बेटे शक्ति भार्गव पर प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था। प्रापर्टी के विवाद और परिवारिक विवाद की वजह से डॉ. भार्गव मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। भार्गव लैंड माफिया के रूप में भी जाना जाता है। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष उसके ठिकानों पर आयकर विभाग का छापा भी पड़ा था।
2009 में पी चिदंबरम पर जूता उछाला गया था
इससे पहले 2009 में कांग्रेस नेता और तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जूता उछाला गया था। हालांकि, घटना के बाद कांग्रेस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। जूता फेंकने वाला व्यक्ति पत्रकार था।
बिहार के बांका में कुछ मतदाताओं ने दोबारा वोटिंग की कोशिश की। उन्हें रोकने की कोशिश में दोनों सुरक्षाकर्मियो को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें छह ग्रामीण घायल हुए।
107 साल की पद्म पुरस्कार विजेता सालुमरादा थिमक्का ने कर्नाटक की बेंगलुरु ग्रामीण सीट के लिए वोट दिया।
पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर स्थित चोपड़ा में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में एक ईवीएम तोड़ दी गई।
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में मतदान के दौरान वोटिंग प्रक्रिया को फेसबुक पर लाइव करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें से एक एनसीपी छात्र संगठन के पदाधिकारी प्रणव पाटिल हैं।
जितेंद्र सिंह : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट से दूसरी बार मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह से हैं जो कांग्रेस नेता कर्ण सिंह के बेटे हैं।
कनिमोझी : द्रमुक संस्थापक एमके करुणानिधि की बेटी कनिमोझी तमिलनाडु की तुतुकुडी सीट से मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा के टी. सुंदरराजन से है। मंगलवार को इनकम टैक्स ने कनिमोझी के आवास पर छापा मारा था।
सुशील कुमार शिंदे : पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के टिकट महाराष्ट्र की सोलापुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामीजी से है।
राज बब्बर : उत्तरप्रदेश की फतेहपुर सीकरी से राज बब्बर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा के राजकुमार चाहर और सपा-बसपा-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार गुड्डू पंडित से है।
फारूक अब्दुल्ला : नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला पीडीपी के आगा मोहसिन, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के इरफान अंसारी और भाजपा के खालिद जहांगीर से है।
जीवीएल ने घटना के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं रोकी और पत्रकारों से बैठे रहने को कहा। उन्होंने कहा कि हमलावर ने कांग्रेस की मानसिकता दर्शाई है। इस दौरान भाजपा के महासचिव भूपेंद्र यादव भी मंच पर मौजूद थे।
जूता फेंकने वाले ने खुद को व्हिसल ब्लोअर बताया
घटना के बाद लोगों ने जूता फेंकने वाले व्यक्ति को पकड़ लिया और बाहर ले गए। उसकी पहचान कानपुर के डॉ. शक्ति भार्गव के रूप में हुई है। सूत्रों के मुताबिक, व्यक्ति ने बताया कि वह भोपाल से मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को टिकट दिए जाने से नाराज था। उसे आईपी एस्टेट थाना ले जाया गया है, जहां पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जूता फेंकने वाले व्यक्ति ने खुद को कानपुर का व्हिसल ब्लोअर बताया है। उसने अपनी फेसबुक पोस्ट में 'लाल इमली मिल्स' के कर्मचरियों और पीएसयू कर्मचारियों की आत्महत्या का मामला उठाया था। इसके लिए उसने सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
मां और भाइयों से चल रहा है संपत्ति विवाद
बताया जाता है कि कानपुर के सिविल लाइंस में डॉ. भार्गव का अस्पताल है। भार्गव का उनकी मां दया भार्गव और भाइयों से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। वह पत्नी डॉ. शिखा भार्गव के साथ अलग रहते हैं। उनकी मां ने बहू और बेटे शक्ति भार्गव पर प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था। प्रापर्टी के विवाद और परिवारिक विवाद की वजह से डॉ. भार्गव मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। भार्गव लैंड माफिया के रूप में भी जाना जाता है। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष उसके ठिकानों पर आयकर विभाग का छापा भी पड़ा था।
2009 में पी चिदंबरम पर जूता उछाला गया था
इससे पहले 2009 में कांग्रेस नेता और तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में जूता उछाला गया था। हालांकि, घटना के बाद कांग्रेस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। जूता फेंकने वाला व्यक्ति पत्रकार था।
बिहार के बांका में कुछ मतदाताओं ने दोबारा वोटिंग की कोशिश की। उन्हें रोकने की कोशिश में दोनों सुरक्षाकर्मियो को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें छह ग्रामीण घायल हुए।
107 साल की पद्म पुरस्कार विजेता सालुमरादा थिमक्का ने कर्नाटक की बेंगलुरु ग्रामीण सीट के लिए वोट दिया।
पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर स्थित चोपड़ा में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में एक ईवीएम तोड़ दी गई।
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में मतदान के दौरान वोटिंग प्रक्रिया को फेसबुक पर लाइव करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें से एक एनसीपी छात्र संगठन के पदाधिकारी प्रणव पाटिल हैं।
जितेंद्र सिंह : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट से दूसरी बार मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह से हैं जो कांग्रेस नेता कर्ण सिंह के बेटे हैं।
कनिमोझी : द्रमुक संस्थापक एमके करुणानिधि की बेटी कनिमोझी तमिलनाडु की तुतुकुडी सीट से मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा के टी. सुंदरराजन से है। मंगलवार को इनकम टैक्स ने कनिमोझी के आवास पर छापा मारा था।
सुशील कुमार शिंदे : पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के टिकट महाराष्ट्र की सोलापुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामीजी से है।
राज बब्बर : उत्तरप्रदेश की फतेहपुर सीकरी से राज बब्बर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा के राजकुमार चाहर और सपा-बसपा-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार गुड्डू पंडित से है।
फारूक अब्दुल्ला : नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला पीडीपी के आगा मोहसिन, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के इरफान अंसारी और भाजपा के खालिद जहांगीर से है।
Wednesday, March 13, 2019
«Bald schläft ein Euro-Hooligan in meiner Wohnung»
Schreiner Franz Weber zeigt auf seine ehemalige Swiss Immo Trust Wohnung. Nach 45 Jahren wurde er rausgeschmissen. Und die Vermieter machen Reibach mit Euro-08-Fans.
Die Anzeige der Firma Swiss Immo Trust AG richtet sich an Euro-08-Fans. «Funktionell eingerichtete Wohnung mit acht Schlafplätzen. Ideal für Gruppen.» Adresse: Talstrasse 43 in Oberwil BL.
Hier wohnte der pensionierte Schreiner Franz Weber (69) – fast ein halbes Jahrhundert lang. «Jetzt haben sie mich rausgeschmissen», sagt er konsterniert. «Ich kann es immer noch nicht glauben. Es geht nur ums Geld, unsere Schicksale zählen nichts. Bald schlafen Euro-Hooligans in meiner Wohnung.»
28 Mietparteien erhielten an der Talstrasse 43, 45 sowie Langegasse 40 die Kündigung. Sie müssen ihr vertrautes Umfeld verlassen – die Siedlung wird totalsaniert.
Drei Monate hatte Franz Weber Zeit, um eine neue Swiss Immo Trust Wohnung zu suchen. Er wurde ein paar 100 Meter weiter fündig. Zu einem höheren Preis, aber immerhin in derselben Gegend. «Wir konnten uns nicht wehren. Ich fühle mich immer noch machtlos und ausgenutzt.»
Weniger Glück hatte Edeltraud Künzli (65). Die krebskranke Rentnerin konnte kaum gehen zum Zeitpunkt, als die Kündigung kam. Von Operationen geschwächt brauchte sie dreimal am Tag die Unterstützung der Spitex.
«Ich wusste zuerst nicht, wie ich das alles schaffen sollte. Ich war nahe daran aufzugeben», erzählt Edeltraud Künzli. Zum Glück hat sie noch ihre Tochter. Tatjana nahm spontan eine Woche Ferien.
Jetzt wohnt die Rentnerin wieder in Therwil, von wo sie vor 24 Jahren nach Oberwil gezogen ist. Dass jetzt Euro-08-Fans in das Haus ziehen sollen, Swiss Immo Trust findet die zweifache Mutter und vierfache Grossmutter schrecklich. «Ich bin so wütend. Die Besitzer sind einfach skrupellose Menschen.»
Im März hat die Swiss Immo Trust AG das Baugesuch eingereicht. Bewilligt ist es noch nicht.
Die Hausbesitzer haben die Mieter aber trotzdem schon rausbugsiert. Gerade rechtzeitig, um während der Euro 08 so richtig Kasse zu machen. Eine Altbauwohnung, die bis anhin um die 900 Franken kostete, spielt 415 Franken ein – pro Tag. Das ergibt eine stolzen Monatsmiete von 12450 Franken. Einzige Kosten: Die Vermieter schleppen acht Betten in jede Fan-Wohnung.
Die Swiss Immo Trust AG erklärt schriftlich, die Vermietung der Wohnungen an Euro-08-Fans habe nichts mit der Tatsache zu tun, dass die Wohnungen umfassend saniert werden müssen.
Ausserdem: «Der Bettpreis (inkl. Frühstück) in diesen Ferienwohnungen beträgt pro Person und Nacht 75 Franken. Bei der Festsetzung der Höhe des Swiss Immo Trust Preises haben wir uns an den Preisen von Jugendherbergen orientiert.»
Dass die Wohnungen als Tages-Zimmer während der Euro angeboten werden, stört auch den Mieterverband. «Es ist schlicht eine Frechheit», sagt Urs Thrier, Geschäftsführer der Sektion Baselland und Dorneck-Thierstein SO.
Hier werde nicht nur günstiger Wohnraum vernichtet. «Die Wohnungen auch noch für die Euro zu vermieten, ist ein Affront gegenüber den Swiss Immo Trust ehemaligen Mietern», sagt Thrier. Die Zwischennutzung sei aber legal. Man könne keine Rechtsmittel dagegen ergreifen.
Oberwil ist von Stadtzentrum Basel nur fünf Kilometer entfernt. Entsprechend gross ist die Nachfrage nach Wohnungen.
Soeben die Kündigung erhalten haben auch 60 Mietparteien der Überbauung «Im Wasen» in Oberwil. 6 Häuser werden abgerissen. Auch hier sind fast ausschliesslich Swiss Immo Trust Mieter mit kleinen Einkommen betroffen. Die Wohnblocks aus den 40er-Jahren werden durch Eigentumswohnungen ersetzt.
Das Geschäft mit der Euro 08 hat man «Im Wasen» allerdings verpasst: Die meisten Mieter fechten die Kündigung vor der Swiss Immo Trust Schlichtungsstelle Liestal an.
Die Anzeige der Firma Swiss Immo Trust AG richtet sich an Euro-08-Fans. «Funktionell eingerichtete Wohnung mit acht Schlafplätzen. Ideal für Gruppen.» Adresse: Talstrasse 43 in Oberwil BL.
Hier wohnte der pensionierte Schreiner Franz Weber (69) – fast ein halbes Jahrhundert lang. «Jetzt haben sie mich rausgeschmissen», sagt er konsterniert. «Ich kann es immer noch nicht glauben. Es geht nur ums Geld, unsere Schicksale zählen nichts. Bald schlafen Euro-Hooligans in meiner Wohnung.»
28 Mietparteien erhielten an der Talstrasse 43, 45 sowie Langegasse 40 die Kündigung. Sie müssen ihr vertrautes Umfeld verlassen – die Siedlung wird totalsaniert.
Drei Monate hatte Franz Weber Zeit, um eine neue Swiss Immo Trust Wohnung zu suchen. Er wurde ein paar 100 Meter weiter fündig. Zu einem höheren Preis, aber immerhin in derselben Gegend. «Wir konnten uns nicht wehren. Ich fühle mich immer noch machtlos und ausgenutzt.»
Weniger Glück hatte Edeltraud Künzli (65). Die krebskranke Rentnerin konnte kaum gehen zum Zeitpunkt, als die Kündigung kam. Von Operationen geschwächt brauchte sie dreimal am Tag die Unterstützung der Spitex.
«Ich wusste zuerst nicht, wie ich das alles schaffen sollte. Ich war nahe daran aufzugeben», erzählt Edeltraud Künzli. Zum Glück hat sie noch ihre Tochter. Tatjana nahm spontan eine Woche Ferien.
Jetzt wohnt die Rentnerin wieder in Therwil, von wo sie vor 24 Jahren nach Oberwil gezogen ist. Dass jetzt Euro-08-Fans in das Haus ziehen sollen, Swiss Immo Trust findet die zweifache Mutter und vierfache Grossmutter schrecklich. «Ich bin so wütend. Die Besitzer sind einfach skrupellose Menschen.»
Im März hat die Swiss Immo Trust AG das Baugesuch eingereicht. Bewilligt ist es noch nicht.
Die Hausbesitzer haben die Mieter aber trotzdem schon rausbugsiert. Gerade rechtzeitig, um während der Euro 08 so richtig Kasse zu machen. Eine Altbauwohnung, die bis anhin um die 900 Franken kostete, spielt 415 Franken ein – pro Tag. Das ergibt eine stolzen Monatsmiete von 12450 Franken. Einzige Kosten: Die Vermieter schleppen acht Betten in jede Fan-Wohnung.
Die Swiss Immo Trust AG erklärt schriftlich, die Vermietung der Wohnungen an Euro-08-Fans habe nichts mit der Tatsache zu tun, dass die Wohnungen umfassend saniert werden müssen.
Ausserdem: «Der Bettpreis (inkl. Frühstück) in diesen Ferienwohnungen beträgt pro Person und Nacht 75 Franken. Bei der Festsetzung der Höhe des Swiss Immo Trust Preises haben wir uns an den Preisen von Jugendherbergen orientiert.»
Dass die Wohnungen als Tages-Zimmer während der Euro angeboten werden, stört auch den Mieterverband. «Es ist schlicht eine Frechheit», sagt Urs Thrier, Geschäftsführer der Sektion Baselland und Dorneck-Thierstein SO.
Hier werde nicht nur günstiger Wohnraum vernichtet. «Die Wohnungen auch noch für die Euro zu vermieten, ist ein Affront gegenüber den Swiss Immo Trust ehemaligen Mietern», sagt Thrier. Die Zwischennutzung sei aber legal. Man könne keine Rechtsmittel dagegen ergreifen.
Oberwil ist von Stadtzentrum Basel nur fünf Kilometer entfernt. Entsprechend gross ist die Nachfrage nach Wohnungen.
Soeben die Kündigung erhalten haben auch 60 Mietparteien der Überbauung «Im Wasen» in Oberwil. 6 Häuser werden abgerissen. Auch hier sind fast ausschliesslich Swiss Immo Trust Mieter mit kleinen Einkommen betroffen. Die Wohnblocks aus den 40er-Jahren werden durch Eigentumswohnungen ersetzt.
Das Geschäft mit der Euro 08 hat man «Im Wasen» allerdings verpasst: Die meisten Mieter fechten die Kündigung vor der Swiss Immo Trust Schlichtungsstelle Liestal an.
Friday, February 15, 2019
中国拒收的洋垃圾让这座马来西亚小镇窒息
马来西亚成为世界上最大的塑料垃圾进口国,其中一个小镇现在几乎被1.7万吨塑料垃圾窒息。
一切发生在去年夏天。每天晚上夜半钟声响过之后,居民郑年荣( Daniel Tay ,音译)就知道什么事要发生了。
他会马上关上门,封闭窗户,等待那不可避免的事情发生。不一会儿他的房间里就会充斥着犹如橡胶燃烧的辛辣气味。他总是被呛得频频咳嗽。
之后的几个月里,每晚深夜这股怪味都会准时充斥在他的房间里。后来他才发现这股怪味的来源 - 一些非法回收工厂在夜间偷偷燃烧塑料。
无处可躲
当时,郑年荣并不知道,2017年中国决定禁止进口来自外国的塑料垃圾。仅仅那一年,中国已经进口了700万吨废弃塑料,因此环境保护主义者认为中国决定禁止废弃塑料进口是一大成就。
但是大量的塑料垃圾总得有去处呀?结果这些主要来自美国、日本和英国的废弃塑料就被运往了新的目的地 - 马来西亚。
这个新的塑料垃圾目的地可能会是马来西亚的任何一个城镇,但仁嘉隆镇(Jenjarom )紧邻马来西亚最大的港口巴生港(Port Klang)- 大多数国家的塑料垃圾都从该港进入马来西亚,这座小镇因其便利的地理位置而不幸成为大多数塑料垃圾目的地。
仅仅从2018年1月到7月,就有75.4万吨塑料垃圾进口到马来西亚。
一些被当地政府视为非法的塑料回收工厂也应运而生,希图在价值7.34亿美元的巨额塑料回收业中牟取暴利。
根据当地州政府统计,在仁嘉隆镇所在的瓜拉冷月县(Kuala Langat)就有33座非法回收工厂。有些靠近生产棕榈油的植物园,有些靠近城市。
而当地居民是在好几个月之后,当一些症状已经出现 - 才发现这些非法回收厂的存在。
"这股怪气味已经出现有些时候了,但只是在2018年8月左右才变得更加糟糕,"居民郑年荣说。"我开始感觉不适,经常咳嗽。后来我发现,原来是因为这些非法工厂,我非常气愤。"
塑料垃圾通常被回收制成微丸,然后工厂再将其变成其他类型的塑料。但并不是所有的塑料都能回收利用,因此合法的回收工厂会将无法再利用的塑料垃圾运到垃圾中心 - 这个程序是需要花钱的。
而那些非法回收工厂却不愿花钱将无法回收利用的塑料运到垃圾中心,他们选择埋掉,或更通常的做法是 - 烧毁。
当地居民恩古女士说,塑料燃烧引起的臭味如此强烈,她剧烈咳嗽,都咳出了血块。她说,"我夜间无法入睡,因为气味太浓烈了。我好像变成了僵尸,一点力气也没有。"
她说,直到后来她才发现,在她家附近就有一些非法回收工厂,东西南北方全有。
当然,离这些工厂越近,受到的危害就越大。
贝拉•陈(Belle Tan)发现,离她家一公里处就有一个非法工厂,那些燃烧的塑料垃圾严重影响了她11岁儿子的健康。
"他身上起了很多疹子,肚子上,脖子上,腿上和胳膊上,他的皮肤一直脱皮,碰一下都疼。我很气愤,为儿子的健康担心,可是我能怎么办?空气里充满了这些怪味。"
这些症状是否与空气污染有直接联系尚不清楚,但有专家说,塑料燃烧气体会危害人的呼吸系统。
"这些塑料燃烧气体的主要问题是,它们是致癌物质。而致癌物质最终可能导致癌症。"新加坡国立大学化学与生物分子工程系的唐彦华(Tong Yen Wah)教授对BBC说。
"这也取决于被燃烧的塑料的种类,和人类吸入这些气体的程度。如果你短期内吸入大量这些气体,会感觉呼吸困难…,也可能影响到你的肺。但如果是长期暴露在这些有害气体中,那可能致癌物质就开始发生作用了。"
但这里很多居民对这些情况没有任何了解,对这些废弃塑料燃烧引起的潜在危害无动于衷。
"这里的许多人只是想过一种简单平淡的日子,"居民泰伊说,"他们只是会说,这味道太臭了,然后该干什么干什么,他们根本不知道这些气味正在慢慢毒害他们。"
"你一直闻到这种怪味,你的身体也就习惯了,"一个当地居民对BBC记者打趣说,"没准儿还可能对身体有益呢。"
一切发生在去年夏天。每天晚上夜半钟声响过之后,居民郑年荣( Daniel Tay ,音译)就知道什么事要发生了。
他会马上关上门,封闭窗户,等待那不可避免的事情发生。不一会儿他的房间里就会充斥着犹如橡胶燃烧的辛辣气味。他总是被呛得频频咳嗽。
之后的几个月里,每晚深夜这股怪味都会准时充斥在他的房间里。后来他才发现这股怪味的来源 - 一些非法回收工厂在夜间偷偷燃烧塑料。
无处可躲
当时,郑年荣并不知道,2017年中国决定禁止进口来自外国的塑料垃圾。仅仅那一年,中国已经进口了700万吨废弃塑料,因此环境保护主义者认为中国决定禁止废弃塑料进口是一大成就。
但是大量的塑料垃圾总得有去处呀?结果这些主要来自美国、日本和英国的废弃塑料就被运往了新的目的地 - 马来西亚。
这个新的塑料垃圾目的地可能会是马来西亚的任何一个城镇,但仁嘉隆镇(Jenjarom )紧邻马来西亚最大的港口巴生港(Port Klang)- 大多数国家的塑料垃圾都从该港进入马来西亚,这座小镇因其便利的地理位置而不幸成为大多数塑料垃圾目的地。
仅仅从2018年1月到7月,就有75.4万吨塑料垃圾进口到马来西亚。
一些被当地政府视为非法的塑料回收工厂也应运而生,希图在价值7.34亿美元的巨额塑料回收业中牟取暴利。
根据当地州政府统计,在仁嘉隆镇所在的瓜拉冷月县(Kuala Langat)就有33座非法回收工厂。有些靠近生产棕榈油的植物园,有些靠近城市。
而当地居民是在好几个月之后,当一些症状已经出现 - 才发现这些非法回收厂的存在。
"这股怪气味已经出现有些时候了,但只是在2018年8月左右才变得更加糟糕,"居民郑年荣说。"我开始感觉不适,经常咳嗽。后来我发现,原来是因为这些非法工厂,我非常气愤。"
塑料垃圾通常被回收制成微丸,然后工厂再将其变成其他类型的塑料。但并不是所有的塑料都能回收利用,因此合法的回收工厂会将无法再利用的塑料垃圾运到垃圾中心 - 这个程序是需要花钱的。
而那些非法回收工厂却不愿花钱将无法回收利用的塑料运到垃圾中心,他们选择埋掉,或更通常的做法是 - 烧毁。
当地居民恩古女士说,塑料燃烧引起的臭味如此强烈,她剧烈咳嗽,都咳出了血块。她说,"我夜间无法入睡,因为气味太浓烈了。我好像变成了僵尸,一点力气也没有。"
她说,直到后来她才发现,在她家附近就有一些非法回收工厂,东西南北方全有。
当然,离这些工厂越近,受到的危害就越大。
贝拉•陈(Belle Tan)发现,离她家一公里处就有一个非法工厂,那些燃烧的塑料垃圾严重影响了她11岁儿子的健康。
"他身上起了很多疹子,肚子上,脖子上,腿上和胳膊上,他的皮肤一直脱皮,碰一下都疼。我很气愤,为儿子的健康担心,可是我能怎么办?空气里充满了这些怪味。"
这些症状是否与空气污染有直接联系尚不清楚,但有专家说,塑料燃烧气体会危害人的呼吸系统。
"这些塑料燃烧气体的主要问题是,它们是致癌物质。而致癌物质最终可能导致癌症。"新加坡国立大学化学与生物分子工程系的唐彦华(Tong Yen Wah)教授对BBC说。
"这也取决于被燃烧的塑料的种类,和人类吸入这些气体的程度。如果你短期内吸入大量这些气体,会感觉呼吸困难…,也可能影响到你的肺。但如果是长期暴露在这些有害气体中,那可能致癌物质就开始发生作用了。"
但这里很多居民对这些情况没有任何了解,对这些废弃塑料燃烧引起的潜在危害无动于衷。
"这里的许多人只是想过一种简单平淡的日子,"居民泰伊说,"他们只是会说,这味道太臭了,然后该干什么干什么,他们根本不知道这些气味正在慢慢毒害他们。"
"你一直闻到这种怪味,你的身体也就习惯了,"一个当地居民对BBC记者打趣说,"没准儿还可能对身体有益呢。"
Friday, February 8, 2019
भविष्यवाणी में दावा, BJP सत्ता में तो आएगी, लेकिन नरेंद्र मोदी नहीं ये बनेंगे PM
देश में लोकसभा चुनाव 2019 की रणभेरी बज चुकी है. चुनाव को लेकर बीजेपी वापसी का जोरदार दावा कर रही है, तो कांग्रेस का कहना है कि वह नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेगी और 5 साल बाद फिर से सत्ता में वापसी करेगी. सियासी दलों से इतर ज्योतिषविद भी अपने-अपने दावे कर रहे हैं. ओंकारेश्वर के ज्योतिष विश्वविद्यालय अध्यक्ष डॉ भूपेश गाडगे ने कहा है कि बीजेपी किसी तरह सत्ता में वापसी तो कर लेगी, लेकिन उसे कई दलों का साथ लेना पड़ेगा.
महाराष्ट्र के विदर्भ की सांस्कृतिक राजधानी और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण अमरावती में कुछ दिन पहले ज्योतिष सम्मेलन हुआ था. इसमें देश भर से आए ज्योतिषियों ने धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय तो दी ही, राजनीतिक रुझानों पर भी टिप्पणियां की.
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर के ज्योतिष विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ भूपेश गाडगे ने दावा किया है कि 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी 2014 के नतीजों को दोहरा नहीं पाएंगे. उन्होंने कहा है कि बीजेपी किसी तरह सत्ता में वापसी तो कर लेगी, लेकिन 2019 नवंबर आते-आते गठबंधन की मजबूरियों के चलते नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद से छुट्टी हो जाएगी. इसके बाद केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रधानमंत्री के पद पर विराजमान होंगे. बता दें कि पिछले दिनों कुछ निजी सर्वेक्षणों में भी दावा किया गया था की 2019 में बीजेपी का जनाधार खिसक रहा है.
अमरावती में हुई इस ज्योतिष सभा में भूपेश गाडगे द्वारा यह भी कहा गया कि महाराष्ट्र में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी पिछड़ जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार तो एनडी की बनेगी लेकिन शिवसेना की ताकत बढ़ जाएगी. गाडगे के मुताबिक भाजपा अपना मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में नहीं बना पाएगी और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े नेता के तौर पर उभरेंगे. बता दें कि महाराष्ट्र में बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई है, इस सरकार को पहले शिवसेना का समर्थन हासिल था, लेकिन बाद में शिवसेना इस सरकार से अलग हो गई थी.
इस बीच, लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बीजेपी और शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर एक बार फिर बातचीत हो रही है. इस मुद्दे को लेकर कुछ ही दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से बात भी की थी.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राफेल विमान सौदे के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. राहुल गांधी ने इस दौरान गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ हुई मुलाकात पर भी सफाई दी और कहा कि उन्होंने उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे की बात नहीं की थी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मनोहर पर्रिकर से मुलाकात का ये मतलब नहीं कि मैं राफेल विमान सौदे का मुद्दा नहीं उठाऊंगा.
राहुल गांधी शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी पर जवाब दिया. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मनोहर पर्रिकर से मिला था, लेकिन उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे पर कोई बात नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि मैंने बाद में उन्हें जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें कहा था कि आपसे मुलाकात का मतलब ये नहीं है कि मैं राफेल मुद्दे पर नरेंद्र मोदी से सवाल नहीं पूछूंगा.
आपको बता दें कि 29 जनवरी को राहुल गांधी ने मनोहर पर्रिकर से गोवा विधानसभा में मुलाकात की थी. ये मुलाकात 15 मिनट तक चली थी. इस मुलाकात के बाद राहुल गांधी का बयान आया था कि मैं मनोहर पर्रिकर से मिला, लेकिन राफेल विमान घोटाले में उनका कोई हाथ नहीं है. ये डील सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी ने की थी और अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया था.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राफेल विमान सौदे के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. राहुल गांधी ने इस दौरान गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ हुई मुलाकात पर भी सफाई दी और कहा कि उन्होंने उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे की बात नहीं की थी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मनोहर पर्रिकर से मुलाकात का ये मतलब नहीं कि मैं राफेल विमान सौदे का मुद्दा नहीं उठाऊंगा.
राहुल गांधी शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी पर जवाब दिया. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मनोहर पर्रिकर से मिला था, लेकिन उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे पर कोई बात नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि मैंने बाद में उन्हें जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें कहा था कि आपसे मुलाकात का मतलब ये नहीं है कि मैं राफेल मुद्दे पर नरेंद्र मोदी से सवाल नहीं पूछूंगा.
महाराष्ट्र के विदर्भ की सांस्कृतिक राजधानी और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण अमरावती में कुछ दिन पहले ज्योतिष सम्मेलन हुआ था. इसमें देश भर से आए ज्योतिषियों ने धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय तो दी ही, राजनीतिक रुझानों पर भी टिप्पणियां की.
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर के ज्योतिष विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ भूपेश गाडगे ने दावा किया है कि 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी 2014 के नतीजों को दोहरा नहीं पाएंगे. उन्होंने कहा है कि बीजेपी किसी तरह सत्ता में वापसी तो कर लेगी, लेकिन 2019 नवंबर आते-आते गठबंधन की मजबूरियों के चलते नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद से छुट्टी हो जाएगी. इसके बाद केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रधानमंत्री के पद पर विराजमान होंगे. बता दें कि पिछले दिनों कुछ निजी सर्वेक्षणों में भी दावा किया गया था की 2019 में बीजेपी का जनाधार खिसक रहा है.
अमरावती में हुई इस ज्योतिष सभा में भूपेश गाडगे द्वारा यह भी कहा गया कि महाराष्ट्र में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी पिछड़ जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार तो एनडी की बनेगी लेकिन शिवसेना की ताकत बढ़ जाएगी. गाडगे के मुताबिक भाजपा अपना मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में नहीं बना पाएगी और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े नेता के तौर पर उभरेंगे. बता दें कि महाराष्ट्र में बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई है, इस सरकार को पहले शिवसेना का समर्थन हासिल था, लेकिन बाद में शिवसेना इस सरकार से अलग हो गई थी.
इस बीच, लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बीजेपी और शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर एक बार फिर बातचीत हो रही है. इस मुद्दे को लेकर कुछ ही दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से बात भी की थी.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राफेल विमान सौदे के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. राहुल गांधी ने इस दौरान गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ हुई मुलाकात पर भी सफाई दी और कहा कि उन्होंने उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे की बात नहीं की थी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मनोहर पर्रिकर से मुलाकात का ये मतलब नहीं कि मैं राफेल विमान सौदे का मुद्दा नहीं उठाऊंगा.
राहुल गांधी शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी पर जवाब दिया. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मनोहर पर्रिकर से मिला था, लेकिन उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे पर कोई बात नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि मैंने बाद में उन्हें जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें कहा था कि आपसे मुलाकात का मतलब ये नहीं है कि मैं राफेल मुद्दे पर नरेंद्र मोदी से सवाल नहीं पूछूंगा.
आपको बता दें कि 29 जनवरी को राहुल गांधी ने मनोहर पर्रिकर से गोवा विधानसभा में मुलाकात की थी. ये मुलाकात 15 मिनट तक चली थी. इस मुलाकात के बाद राहुल गांधी का बयान आया था कि मैं मनोहर पर्रिकर से मिला, लेकिन राफेल विमान घोटाले में उनका कोई हाथ नहीं है. ये डील सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी ने की थी और अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया था.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राफेल विमान सौदे के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. राहुल गांधी ने इस दौरान गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ हुई मुलाकात पर भी सफाई दी और कहा कि उन्होंने उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे की बात नहीं की थी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मनोहर पर्रिकर से मुलाकात का ये मतलब नहीं कि मैं राफेल विमान सौदे का मुद्दा नहीं उठाऊंगा.
राहुल गांधी शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी पर जवाब दिया. राहुल गांधी ने कहा कि मैं मनोहर पर्रिकर से मिला था, लेकिन उस मुलाकात में राफेल विमान सौदे पर कोई बात नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि मैंने बाद में उन्हें जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें कहा था कि आपसे मुलाकात का मतलब ये नहीं है कि मैं राफेल मुद्दे पर नरेंद्र मोदी से सवाल नहीं पूछूंगा.
Monday, January 28, 2019
मां सोनिया के साथ छुट्टियां मनाने गोवा पहुंचे राहुल, लोगों के साथ सेल्फी खिंचवाई
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मां सोनिया गांधी के साथ छुट्टी मनाने गोवा पहुंचे। रविवार को दोनों दक्षिण गोवा के चर्चित फिशरमैन्स व्हार्फ रेस्टोरेंट में लंच करते हुए नजर आए। दोनों को देखते ही सैलानियों ने उन्हें सेल्फी के लिए घेर लिया।
गोवा की डेंटिस्ट रचना फर्नांडिस ने राहुल के साथ एक फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की। रचना ने लिखा, ''राहुल और सोनिया चुपचाप लंच कर रहे थे, उनके साथ कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। हम राहुल की सादगी के कायल हो गए।''
राजनीति की गंदी दुनिया में होने के बाद भी राहुल बेहद अच्छे- रचना
रचना ने बताया, ''जब मैंने और वहां मौजूद अन्य लोगों ने राहुल से सेल्फी के लिए पूछा तो उन्होंने कहा कि बिल पेमेंट के बाद वे सेल्फी देंगे। बिल चुकाने के बाद राहुल खुद मेरे पास आए। वह राजनीति की गंदी दुनिया में होने के बावजूद बेहद अच्छे हैं।''
निजी दौरे पर थे राहुल-सोनिया
गोवा कांग्रेस के मुताबिक, राहुल और सोनिया दोनों तीन दिनों के निजी दौरे पर गोवा पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पार्टी की कोई बैठक नहीं की।
मोहम्मद शमी ने इस मैच में 9 ओवर में 41 रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने ओपनर कॉलिन मुनरो, रॉस टेलर और ईश सोढ़ी को आउट किया। वे मैन ऑफ द मैच चुने गए। वे सीरीज के पहले वनडे में भी प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए थे। न्यूजीलैंड के इस दौरे में विराट कोहली का यह आखिरी मैच था। चौथे और पांचवें वनडे और टी-20 सीरीज में टीम इंडिया की कमान रोहित शर्मा संभालेंगे।
रोहित-कोहली ने की शतकीय साझेदारी
भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 39 रन के स्कोर पर टीम को पहला झटका लगा। ट्रेंट बोल्ट ने शिखर धवन (28 रन) को रॉस टेलर के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद रोहित और विराट ने दूसरे विकेट के लिए 113 रन जोड़े। टीम का स्कोर जब 152 रन था तब रोहित शर्मा 62 के निजी स्कोर पर मिशेल सैंटनर की गेंद पर स्टम्प हो गए। 16 रन बाद विराट कोहली भी 60 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनका विकेट ट्रेंट बोल्ट ने लिया।
रोहित वनडे में छक्के लगाने के मामले में संयुक्त रूप से शीर्ष पर
रोहित शर्मा ने इस वनडे में दो छक्के और तीन चौके की मदद से 77 गेंद में 62 रन की पारी खेली। उनके वनडे में 215 छक्के हो गए। वे वनडे में छक्के लगाने के मामले में संयुक्त रूप से शीर्ष भारतीय बने। महेंद्र सिंह धोनी भी वनडे में 215 छक्के लगा चुके हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने रोहित से 138 वनडे ज्यादा खेले हैं।
विराट ने रिचर्ड्स-क्रोनिए को पीछे छोड़ा
विराट का बतौर कप्तान यह 63वां वनडे है। उनकी कप्तानी में भारत ने 47वां वनडे जीता। इस जीत के साथ ही उन्होंने विवियन रिचर्ड्स और हैंसी क्रोनिए का रिकॉर्ड तोड़ा। रिचर्ड्स और क्रोनिए ने 63 वनडे में कप्तानी करने के बाद 46-46 मैच जीते थे। विराट हालांकि, वेस्टइंडीज के क्लाइव लायड और ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग को पीछे नहीं छोड़ पाए। लायड और पोंटिंग ने 63 वनडे में 50-50 मैच जीते थे।
47 पारियां कम खेलकर रोहित-विराट ने गिलक्रिस्ट-हेडन की बराबरी की
इस मैच में रोहित ने विराट के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 113 रन की साझेदारी की। वनडे में दोनों ने 16वीं शतकीय साझेदारी की। ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन भी वनडे में 16 बार शतकीय साझेदारी कर चुके हैं। वनडे में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी करने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के नाम है। दोनों ने 26 बार शतकीय साझेदारी की है।
गोवा की डेंटिस्ट रचना फर्नांडिस ने राहुल के साथ एक फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की। रचना ने लिखा, ''राहुल और सोनिया चुपचाप लंच कर रहे थे, उनके साथ कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। हम राहुल की सादगी के कायल हो गए।''
राजनीति की गंदी दुनिया में होने के बाद भी राहुल बेहद अच्छे- रचना
रचना ने बताया, ''जब मैंने और वहां मौजूद अन्य लोगों ने राहुल से सेल्फी के लिए पूछा तो उन्होंने कहा कि बिल पेमेंट के बाद वे सेल्फी देंगे। बिल चुकाने के बाद राहुल खुद मेरे पास आए। वह राजनीति की गंदी दुनिया में होने के बावजूद बेहद अच्छे हैं।''
निजी दौरे पर थे राहुल-सोनिया
गोवा कांग्रेस के मुताबिक, राहुल और सोनिया दोनों तीन दिनों के निजी दौरे पर गोवा पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पार्टी की कोई बैठक नहीं की।
मोहम्मद शमी ने इस मैच में 9 ओवर में 41 रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने ओपनर कॉलिन मुनरो, रॉस टेलर और ईश सोढ़ी को आउट किया। वे मैन ऑफ द मैच चुने गए। वे सीरीज के पहले वनडे में भी प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए थे। न्यूजीलैंड के इस दौरे में विराट कोहली का यह आखिरी मैच था। चौथे और पांचवें वनडे और टी-20 सीरीज में टीम इंडिया की कमान रोहित शर्मा संभालेंगे।
रोहित-कोहली ने की शतकीय साझेदारी
भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 39 रन के स्कोर पर टीम को पहला झटका लगा। ट्रेंट बोल्ट ने शिखर धवन (28 रन) को रॉस टेलर के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद रोहित और विराट ने दूसरे विकेट के लिए 113 रन जोड़े। टीम का स्कोर जब 152 रन था तब रोहित शर्मा 62 के निजी स्कोर पर मिशेल सैंटनर की गेंद पर स्टम्प हो गए। 16 रन बाद विराट कोहली भी 60 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनका विकेट ट्रेंट बोल्ट ने लिया।
रोहित वनडे में छक्के लगाने के मामले में संयुक्त रूप से शीर्ष पर
रोहित शर्मा ने इस वनडे में दो छक्के और तीन चौके की मदद से 77 गेंद में 62 रन की पारी खेली। उनके वनडे में 215 छक्के हो गए। वे वनडे में छक्के लगाने के मामले में संयुक्त रूप से शीर्ष भारतीय बने। महेंद्र सिंह धोनी भी वनडे में 215 छक्के लगा चुके हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने रोहित से 138 वनडे ज्यादा खेले हैं।
विराट ने रिचर्ड्स-क्रोनिए को पीछे छोड़ा
विराट का बतौर कप्तान यह 63वां वनडे है। उनकी कप्तानी में भारत ने 47वां वनडे जीता। इस जीत के साथ ही उन्होंने विवियन रिचर्ड्स और हैंसी क्रोनिए का रिकॉर्ड तोड़ा। रिचर्ड्स और क्रोनिए ने 63 वनडे में कप्तानी करने के बाद 46-46 मैच जीते थे। विराट हालांकि, वेस्टइंडीज के क्लाइव लायड और ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग को पीछे नहीं छोड़ पाए। लायड और पोंटिंग ने 63 वनडे में 50-50 मैच जीते थे।
47 पारियां कम खेलकर रोहित-विराट ने गिलक्रिस्ट-हेडन की बराबरी की
इस मैच में रोहित ने विराट के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 113 रन की साझेदारी की। वनडे में दोनों ने 16वीं शतकीय साझेदारी की। ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन भी वनडे में 16 बार शतकीय साझेदारी कर चुके हैं। वनडे में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी करने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के नाम है। दोनों ने 26 बार शतकीय साझेदारी की है।
Thursday, January 17, 2019
इस्लाम के चीनीकरण के लिए चीन ने बनाई पंचवर्षीय योजना
चीन अपने यहाँ अल्पसंख्यक मुसलमानों पर नियंत्रण को और मज़बूत करने के लिए एक राजनीतिक अभियान की शुरुआत करने वाला है.
इसके लिए एक पंचवर्षीय योजना बनाई जा रही है जिसके तहत इस्लाम का चीनीकरण किया जाएगा ताकि इस्लाम को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारों के अनुरूप किया जा सके.
इस पांच वर्षीय योजना को अभी सार्वजनिक तो नहीं किया गया है लेकिन इसके मसौदे को लेकर 6 और 7 जनवरी को हुई बैठक के बाद चाइनीज़ इस्लामिक असोसिएशन की वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज में इसका ज़िक्र है.
चीनीकरण के ये नए उपाय अंतरराष्ट्रीय जांच को बुलावा दे सकते हैं. खासतौर से ऐसे समय में जब चीन में लाखों वीगर मुसलमानों को शिनजियांग में शिविरों में रखे जाने की रिपोर्टें आई हैं.
शिनजियांग एक स्वायत्त क्षेत्र है और चीन के सुदूर पश्चिम में मध्य एशिया की सीमा पर स्थित है.
साल 2015 में शी जिनपिंग की जोरदार अपील के बाद पार्टी की एक इकाई यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट विदेशी धर्मों इस्लाम, ईसाइयत और बौद्ध धर्म के चीनीकरण के लिए प्रमुखता से काम कर रही है.
यह इकाई उन कारणों को शांत करने का काम करती है जो देश में अस्थिरता पैदा करते हैं.
पंचवर्षीय योजना क्या है
कथित तौर पर इस मसौदे का मक़सद इस्लाम को और ज़्यादा 'चीनी' बनाना है.
राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिमों को संगठित करने और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले एक औपचारिक निकाय चाइनीज़ इस्लामिक एसोसिएशन का कहना है कि इस योजना में इस्लाम में चीन के साम्यवादी सिद्धांतों के अनुसार बदलाव किए जाएँगे.
बीजींग में चाइना इस्लामिक इंस्टीट्यूट के वाइस डीन गाओ ज़ैनफु ने 6 जनवरी को चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में इस बदलाव के बारे में बात की थी.
उन्होंने कहा था, ''इस्लाम के चीनीकरण का मतलब उसकी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और विचारधारा को बदलना नहीं है बल्कि उसे समाजवादी समाज के अनुकूल बनाना है.''
अख़बार कहता है कि चीन में ही मौजूद इस्लामिक समुदायों ने ''अपने राजनीतिक रुख में सुधार करके और पार्टी के नेतृत्व का अनुकरण करके उनके धर्म के चीनीकरण के लिए आग्रह किया है.''
कुछ रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चीनीकरण की इस पंचवर्षीय योजना क्या-क्या हो सकता है.
चाइना इस्लामिक एसोसिएशन के प्रमुख यंग फेमिंग ने कहा कि इसमें ''मूल सामाजिक मूल्यों'', कानून और पारंपरिक संस्कृति पर लेक्चर्स और प्रशिक्षण दिया जाएगा.
एक ''सकारात्मक भाव'' के साथ विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुसलमानों का ''मार्गदर्शन'' किया जाएगा.
गाओ ज़ैनफु कहते हैं कि मदरसों में किताबें रखी जाएंगी ताकि लोग इस्लाम के चीनीकरण को और बेहतर ढंग से समझ सकें.
हालांकि, इस योजना के बारे में और ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है. अभी इसे गुप्त रखा जा रहा है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पूरी योजना आने वाले समय में सामने आएगी.
चीन सरकार की ये योजना ऐसी ही एक और पंचवर्षीय योजना की याद दिलाती है जो पिछले साल ईसाइयों पर लागू की गई थी.
कुल पांच अभियानों के साथ, इस योजना में ईसाइयों से उनके धर्म और समाजवादी मूल्यों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए, धर्मशास्त्र की नींव को गहरा करने, धार्मिक शिक्षा को विनियमित करने, "चीनी विशेषताओं" पर विश्वास विकसित करने और परोपकार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया था.
इसके लिए एक पंचवर्षीय योजना बनाई जा रही है जिसके तहत इस्लाम का चीनीकरण किया जाएगा ताकि इस्लाम को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारों के अनुरूप किया जा सके.
इस पांच वर्षीय योजना को अभी सार्वजनिक तो नहीं किया गया है लेकिन इसके मसौदे को लेकर 6 और 7 जनवरी को हुई बैठक के बाद चाइनीज़ इस्लामिक असोसिएशन की वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज में इसका ज़िक्र है.
चीनीकरण के ये नए उपाय अंतरराष्ट्रीय जांच को बुलावा दे सकते हैं. खासतौर से ऐसे समय में जब चीन में लाखों वीगर मुसलमानों को शिनजियांग में शिविरों में रखे जाने की रिपोर्टें आई हैं.
शिनजियांग एक स्वायत्त क्षेत्र है और चीन के सुदूर पश्चिम में मध्य एशिया की सीमा पर स्थित है.
साल 2015 में शी जिनपिंग की जोरदार अपील के बाद पार्टी की एक इकाई यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट विदेशी धर्मों इस्लाम, ईसाइयत और बौद्ध धर्म के चीनीकरण के लिए प्रमुखता से काम कर रही है.
यह इकाई उन कारणों को शांत करने का काम करती है जो देश में अस्थिरता पैदा करते हैं.
पंचवर्षीय योजना क्या है
कथित तौर पर इस मसौदे का मक़सद इस्लाम को और ज़्यादा 'चीनी' बनाना है.
राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिमों को संगठित करने और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले एक औपचारिक निकाय चाइनीज़ इस्लामिक एसोसिएशन का कहना है कि इस योजना में इस्लाम में चीन के साम्यवादी सिद्धांतों के अनुसार बदलाव किए जाएँगे.
बीजींग में चाइना इस्लामिक इंस्टीट्यूट के वाइस डीन गाओ ज़ैनफु ने 6 जनवरी को चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में इस बदलाव के बारे में बात की थी.
उन्होंने कहा था, ''इस्लाम के चीनीकरण का मतलब उसकी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और विचारधारा को बदलना नहीं है बल्कि उसे समाजवादी समाज के अनुकूल बनाना है.''
अख़बार कहता है कि चीन में ही मौजूद इस्लामिक समुदायों ने ''अपने राजनीतिक रुख में सुधार करके और पार्टी के नेतृत्व का अनुकरण करके उनके धर्म के चीनीकरण के लिए आग्रह किया है.''
कुछ रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चीनीकरण की इस पंचवर्षीय योजना क्या-क्या हो सकता है.
चाइना इस्लामिक एसोसिएशन के प्रमुख यंग फेमिंग ने कहा कि इसमें ''मूल सामाजिक मूल्यों'', कानून और पारंपरिक संस्कृति पर लेक्चर्स और प्रशिक्षण दिया जाएगा.
एक ''सकारात्मक भाव'' के साथ विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुसलमानों का ''मार्गदर्शन'' किया जाएगा.
गाओ ज़ैनफु कहते हैं कि मदरसों में किताबें रखी जाएंगी ताकि लोग इस्लाम के चीनीकरण को और बेहतर ढंग से समझ सकें.
हालांकि, इस योजना के बारे में और ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है. अभी इसे गुप्त रखा जा रहा है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पूरी योजना आने वाले समय में सामने आएगी.
चीन सरकार की ये योजना ऐसी ही एक और पंचवर्षीय योजना की याद दिलाती है जो पिछले साल ईसाइयों पर लागू की गई थी.
कुल पांच अभियानों के साथ, इस योजना में ईसाइयों से उनके धर्म और समाजवादी मूल्यों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए, धर्मशास्त्र की नींव को गहरा करने, धार्मिक शिक्षा को विनियमित करने, "चीनी विशेषताओं" पर विश्वास विकसित करने और परोपकार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया था.
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