कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मां सोनिया गांधी के साथ छुट्टी मनाने गोवा पहुंचे। रविवार को दोनों दक्षिण गोवा के चर्चित फिशरमैन्स व्हार्फ रेस्टोरेंट में लंच करते हुए नजर आए। दोनों को देखते ही सैलानियों ने उन्हें सेल्फी के लिए घेर लिया।
गोवा की डेंटिस्ट रचना फर्नांडिस ने राहुल के साथ एक फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की। रचना ने लिखा, ''राहुल और सोनिया चुपचाप लंच कर रहे थे, उनके साथ कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। हम राहुल की सादगी के कायल हो गए।''
राजनीति की गंदी दुनिया में होने के बाद भी राहुल बेहद अच्छे- रचना
रचना ने बताया, ''जब मैंने और वहां मौजूद अन्य लोगों ने राहुल से सेल्फी के लिए पूछा तो उन्होंने कहा कि बिल पेमेंट के बाद वे सेल्फी देंगे। बिल चुकाने के बाद राहुल खुद मेरे पास आए। वह राजनीति की गंदी दुनिया में होने के बावजूद बेहद अच्छे हैं।''
निजी दौरे पर थे राहुल-सोनिया
गोवा कांग्रेस के मुताबिक, राहुल और सोनिया दोनों तीन दिनों के निजी दौरे पर गोवा पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पार्टी की कोई बैठक नहीं की।
मोहम्मद शमी ने इस मैच में 9 ओवर में 41 रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने ओपनर कॉलिन मुनरो, रॉस टेलर और ईश सोढ़ी को आउट किया। वे मैन ऑफ द मैच चुने गए। वे सीरीज के पहले वनडे में भी प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए थे। न्यूजीलैंड के इस दौरे में विराट कोहली का यह आखिरी मैच था। चौथे और पांचवें वनडे और टी-20 सीरीज में टीम इंडिया की कमान रोहित शर्मा संभालेंगे।
रोहित-कोहली ने की शतकीय साझेदारी
भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 39 रन के स्कोर पर टीम को पहला झटका लगा। ट्रेंट बोल्ट ने शिखर धवन (28 रन) को रॉस टेलर के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद रोहित और विराट ने दूसरे विकेट के लिए 113 रन जोड़े। टीम का स्कोर जब 152 रन था तब रोहित शर्मा 62 के निजी स्कोर पर मिशेल सैंटनर की गेंद पर स्टम्प हो गए। 16 रन बाद विराट कोहली भी 60 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनका विकेट ट्रेंट बोल्ट ने लिया।
रोहित वनडे में छक्के लगाने के मामले में संयुक्त रूप से शीर्ष पर
रोहित शर्मा ने इस वनडे में दो छक्के और तीन चौके की मदद से 77 गेंद में 62 रन की पारी खेली। उनके वनडे में 215 छक्के हो गए। वे वनडे में छक्के लगाने के मामले में संयुक्त रूप से शीर्ष भारतीय बने। महेंद्र सिंह धोनी भी वनडे में 215 छक्के लगा चुके हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने रोहित से 138 वनडे ज्यादा खेले हैं।
विराट ने रिचर्ड्स-क्रोनिए को पीछे छोड़ा
विराट का बतौर कप्तान यह 63वां वनडे है। उनकी कप्तानी में भारत ने 47वां वनडे जीता। इस जीत के साथ ही उन्होंने विवियन रिचर्ड्स और हैंसी क्रोनिए का रिकॉर्ड तोड़ा। रिचर्ड्स और क्रोनिए ने 63 वनडे में कप्तानी करने के बाद 46-46 मैच जीते थे। विराट हालांकि, वेस्टइंडीज के क्लाइव लायड और ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग को पीछे नहीं छोड़ पाए। लायड और पोंटिंग ने 63 वनडे में 50-50 मैच जीते थे।
47 पारियां कम खेलकर रोहित-विराट ने गिलक्रिस्ट-हेडन की बराबरी की
इस मैच में रोहित ने विराट के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 113 रन की साझेदारी की। वनडे में दोनों ने 16वीं शतकीय साझेदारी की। ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन भी वनडे में 16 बार शतकीय साझेदारी कर चुके हैं। वनडे में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी करने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के नाम है। दोनों ने 26 बार शतकीय साझेदारी की है।
Monday, January 28, 2019
Thursday, January 17, 2019
इस्लाम के चीनीकरण के लिए चीन ने बनाई पंचवर्षीय योजना
चीन अपने यहाँ अल्पसंख्यक मुसलमानों पर नियंत्रण को और मज़बूत करने के लिए एक राजनीतिक अभियान की शुरुआत करने वाला है.
इसके लिए एक पंचवर्षीय योजना बनाई जा रही है जिसके तहत इस्लाम का चीनीकरण किया जाएगा ताकि इस्लाम को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारों के अनुरूप किया जा सके.
इस पांच वर्षीय योजना को अभी सार्वजनिक तो नहीं किया गया है लेकिन इसके मसौदे को लेकर 6 और 7 जनवरी को हुई बैठक के बाद चाइनीज़ इस्लामिक असोसिएशन की वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज में इसका ज़िक्र है.
चीनीकरण के ये नए उपाय अंतरराष्ट्रीय जांच को बुलावा दे सकते हैं. खासतौर से ऐसे समय में जब चीन में लाखों वीगर मुसलमानों को शिनजियांग में शिविरों में रखे जाने की रिपोर्टें आई हैं.
शिनजियांग एक स्वायत्त क्षेत्र है और चीन के सुदूर पश्चिम में मध्य एशिया की सीमा पर स्थित है.
साल 2015 में शी जिनपिंग की जोरदार अपील के बाद पार्टी की एक इकाई यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट विदेशी धर्मों इस्लाम, ईसाइयत और बौद्ध धर्म के चीनीकरण के लिए प्रमुखता से काम कर रही है.
यह इकाई उन कारणों को शांत करने का काम करती है जो देश में अस्थिरता पैदा करते हैं.
पंचवर्षीय योजना क्या है
कथित तौर पर इस मसौदे का मक़सद इस्लाम को और ज़्यादा 'चीनी' बनाना है.
राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिमों को संगठित करने और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले एक औपचारिक निकाय चाइनीज़ इस्लामिक एसोसिएशन का कहना है कि इस योजना में इस्लाम में चीन के साम्यवादी सिद्धांतों के अनुसार बदलाव किए जाएँगे.
बीजींग में चाइना इस्लामिक इंस्टीट्यूट के वाइस डीन गाओ ज़ैनफु ने 6 जनवरी को चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में इस बदलाव के बारे में बात की थी.
उन्होंने कहा था, ''इस्लाम के चीनीकरण का मतलब उसकी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और विचारधारा को बदलना नहीं है बल्कि उसे समाजवादी समाज के अनुकूल बनाना है.''
अख़बार कहता है कि चीन में ही मौजूद इस्लामिक समुदायों ने ''अपने राजनीतिक रुख में सुधार करके और पार्टी के नेतृत्व का अनुकरण करके उनके धर्म के चीनीकरण के लिए आग्रह किया है.''
कुछ रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चीनीकरण की इस पंचवर्षीय योजना क्या-क्या हो सकता है.
चाइना इस्लामिक एसोसिएशन के प्रमुख यंग फेमिंग ने कहा कि इसमें ''मूल सामाजिक मूल्यों'', कानून और पारंपरिक संस्कृति पर लेक्चर्स और प्रशिक्षण दिया जाएगा.
एक ''सकारात्मक भाव'' के साथ विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुसलमानों का ''मार्गदर्शन'' किया जाएगा.
गाओ ज़ैनफु कहते हैं कि मदरसों में किताबें रखी जाएंगी ताकि लोग इस्लाम के चीनीकरण को और बेहतर ढंग से समझ सकें.
हालांकि, इस योजना के बारे में और ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है. अभी इसे गुप्त रखा जा रहा है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पूरी योजना आने वाले समय में सामने आएगी.
चीन सरकार की ये योजना ऐसी ही एक और पंचवर्षीय योजना की याद दिलाती है जो पिछले साल ईसाइयों पर लागू की गई थी.
कुल पांच अभियानों के साथ, इस योजना में ईसाइयों से उनके धर्म और समाजवादी मूल्यों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए, धर्मशास्त्र की नींव को गहरा करने, धार्मिक शिक्षा को विनियमित करने, "चीनी विशेषताओं" पर विश्वास विकसित करने और परोपकार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया था.
इसके लिए एक पंचवर्षीय योजना बनाई जा रही है जिसके तहत इस्लाम का चीनीकरण किया जाएगा ताकि इस्लाम को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारों के अनुरूप किया जा सके.
इस पांच वर्षीय योजना को अभी सार्वजनिक तो नहीं किया गया है लेकिन इसके मसौदे को लेकर 6 और 7 जनवरी को हुई बैठक के बाद चाइनीज़ इस्लामिक असोसिएशन की वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज में इसका ज़िक्र है.
चीनीकरण के ये नए उपाय अंतरराष्ट्रीय जांच को बुलावा दे सकते हैं. खासतौर से ऐसे समय में जब चीन में लाखों वीगर मुसलमानों को शिनजियांग में शिविरों में रखे जाने की रिपोर्टें आई हैं.
शिनजियांग एक स्वायत्त क्षेत्र है और चीन के सुदूर पश्चिम में मध्य एशिया की सीमा पर स्थित है.
साल 2015 में शी जिनपिंग की जोरदार अपील के बाद पार्टी की एक इकाई यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट विदेशी धर्मों इस्लाम, ईसाइयत और बौद्ध धर्म के चीनीकरण के लिए प्रमुखता से काम कर रही है.
यह इकाई उन कारणों को शांत करने का काम करती है जो देश में अस्थिरता पैदा करते हैं.
पंचवर्षीय योजना क्या है
कथित तौर पर इस मसौदे का मक़सद इस्लाम को और ज़्यादा 'चीनी' बनाना है.
राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिमों को संगठित करने और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले एक औपचारिक निकाय चाइनीज़ इस्लामिक एसोसिएशन का कहना है कि इस योजना में इस्लाम में चीन के साम्यवादी सिद्धांतों के अनुसार बदलाव किए जाएँगे.
बीजींग में चाइना इस्लामिक इंस्टीट्यूट के वाइस डीन गाओ ज़ैनफु ने 6 जनवरी को चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में इस बदलाव के बारे में बात की थी.
उन्होंने कहा था, ''इस्लाम के चीनीकरण का मतलब उसकी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और विचारधारा को बदलना नहीं है बल्कि उसे समाजवादी समाज के अनुकूल बनाना है.''
अख़बार कहता है कि चीन में ही मौजूद इस्लामिक समुदायों ने ''अपने राजनीतिक रुख में सुधार करके और पार्टी के नेतृत्व का अनुकरण करके उनके धर्म के चीनीकरण के लिए आग्रह किया है.''
कुछ रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चीनीकरण की इस पंचवर्षीय योजना क्या-क्या हो सकता है.
चाइना इस्लामिक एसोसिएशन के प्रमुख यंग फेमिंग ने कहा कि इसमें ''मूल सामाजिक मूल्यों'', कानून और पारंपरिक संस्कृति पर लेक्चर्स और प्रशिक्षण दिया जाएगा.
एक ''सकारात्मक भाव'' के साथ विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुसलमानों का ''मार्गदर्शन'' किया जाएगा.
गाओ ज़ैनफु कहते हैं कि मदरसों में किताबें रखी जाएंगी ताकि लोग इस्लाम के चीनीकरण को और बेहतर ढंग से समझ सकें.
हालांकि, इस योजना के बारे में और ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है. अभी इसे गुप्त रखा जा रहा है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पूरी योजना आने वाले समय में सामने आएगी.
चीन सरकार की ये योजना ऐसी ही एक और पंचवर्षीय योजना की याद दिलाती है जो पिछले साल ईसाइयों पर लागू की गई थी.
कुल पांच अभियानों के साथ, इस योजना में ईसाइयों से उनके धर्म और समाजवादी मूल्यों के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए, धर्मशास्त्र की नींव को गहरा करने, धार्मिक शिक्षा को विनियमित करने, "चीनी विशेषताओं" पर विश्वास विकसित करने और परोपकार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया था.
Wednesday, January 9, 2019
GST Council की बैठक जारी, आपको मिल सकता है सस्ते मकान का तोहफा
वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 32वीं बैठक जारी है. नई दिल्ली में हो रही इस बैठक में अंडर कंस्ट्रक्शन मकानों पर बड़ा फैसला हो सकता है. इसके अलावा सर्विस सेक्टर, एमएसएमई को बड़ी राहत मिल सकती है.
दरअसल, बीते दिनों वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट-मकानों पर GST दर घटाने के संकेत दिए थे. अभी ये मकान 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में आते हैं लेकिन काउंसिल मीटिंग में इसे 5 फीसदी करने पर विचार हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो निर्माणाधीन मकान सस्ते हो जाएंगे. इसके अलावा सीमेंट को 28 फीसदी के स्लैब से बाहर किया जा सकता है. इसके साथ ही लघु और मध्यम उद्योगों के लिए कारोबार छूट की सीमा को भी बढ़ाने पर विचार विमर्श हो सकता है.
पीएम मोदी ने भी दिए थे संकेत
इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि उन्होंने जीएसटी काउंसिल से 75 लाख रुपये सालाना तक का कारोबार करने वाले उद्यमों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट देने का आग्रह किया है. इसके अलावा मध्यम वर्ग के लिए बनने वाले घरों को जीएसटी के 5 प्रतिशत के दायरे में लाने का आग्रह किया गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बारे में फैसला करने का अधिकार उनके हाथ में नहीं है बल्कि जीएसटी काउंसिल के हाथ में है. सभी राज्य सरकारें इस परिषद की सदस्य है. उन सबको मिलकर इस बारे में निर्णय करना है. बता दें कि जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक 22 दिसंबर को हुई थी. इस बैठक में 26 वस्तुओं व सेवाओं पर टैक्स की दर कम कर दी गई थी. उन्होंने उम्मीद जतायी कि आने वाले दिनों में जीएसटी काउंसिल जनता के पक्ष में इस बात का ध्यान रखेगी.
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार सुबह सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बेंच में जस्टिस उदय उमेश ललित के शामिल होने पर सवाल उठाए. इस पर जस्टिस यूयू ललित ने संविधान बेंच से खुद को अलग कर लिया. अब इसके लिए नई बेंच बनेगी.
पांच जजों की पीठ ने गुरुवार को कहा कि वह आज मामले की सुनवाई नहीं करेगी बल्कि सिर्फ इसकी टाइमलाइन तय करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आज हम इस मसले पर सुनवाई नहीं करेंगे, बल्कि इसकी समय सीमा तय करेंगे. इस मामले की सुनवाई अब 29 जनवरी से होना तय किया गया है.
राजीव धवन ने कहा कि वह कोर्ट को यह बताना चाहते हैं कि इस मसले के शुरुआती दौर में 1994 में जस्टिस यूयू ललित अदालत की अवमानना के एक मामले में कल्याण सिंह की तरफ से पेश हुए थे. राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस ललित अयोध्या विवाद से जुड़े क्रिमिनल केस में कल्याण सिंह के वकील के रूप में पेश हुए थे.
उन्होंने कहा, 'मैं लॉर्डशिप के सामने बस यह बात लाना चाहता हूं. हमें इस मसले की सुनवाई में कोई आपत्ति नहीं है. अब यह पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर है. मुझे खेद है कि और मैं ऐसा मसला उठाना नहीं चाहता था.'
इस पर सीजेआई ने कहा कि इसमें खेद जताने की क्या बात है, आपने तो बस तथ्य बताया है. हालांकि, यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि जस्टिस यूयू ललित के पीठ में शामिल होने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन इस तरह का मामला उठाने के बाद जस्टिस यूयू ललित ने खुद को इस मसले से अलग कर लिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस बारे में जानकारी दी.
राजीव धवन ने इसके अलावा संविधान पीठ पर भी सवाल उठा दिया, उन्होंने कहा कि ये मामला पहले 3 जजों की पीठ के पास था लेकिन अचानक 5 जजों की पीठ के सामने मामला गया जिसको लेकर कोई न्यायिक आदेश जारी नहीं किया गया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ का गठन करना चीफ जस्टिस का अधिकार है.
दरअसल, बीते दिनों वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट-मकानों पर GST दर घटाने के संकेत दिए थे. अभी ये मकान 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में आते हैं लेकिन काउंसिल मीटिंग में इसे 5 फीसदी करने पर विचार हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो निर्माणाधीन मकान सस्ते हो जाएंगे. इसके अलावा सीमेंट को 28 फीसदी के स्लैब से बाहर किया जा सकता है. इसके साथ ही लघु और मध्यम उद्योगों के लिए कारोबार छूट की सीमा को भी बढ़ाने पर विचार विमर्श हो सकता है.
पीएम मोदी ने भी दिए थे संकेत
इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि उन्होंने जीएसटी काउंसिल से 75 लाख रुपये सालाना तक का कारोबार करने वाले उद्यमों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट देने का आग्रह किया है. इसके अलावा मध्यम वर्ग के लिए बनने वाले घरों को जीएसटी के 5 प्रतिशत के दायरे में लाने का आग्रह किया गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बारे में फैसला करने का अधिकार उनके हाथ में नहीं है बल्कि जीएसटी काउंसिल के हाथ में है. सभी राज्य सरकारें इस परिषद की सदस्य है. उन सबको मिलकर इस बारे में निर्णय करना है. बता दें कि जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक 22 दिसंबर को हुई थी. इस बैठक में 26 वस्तुओं व सेवाओं पर टैक्स की दर कम कर दी गई थी. उन्होंने उम्मीद जतायी कि आने वाले दिनों में जीएसटी काउंसिल जनता के पक्ष में इस बात का ध्यान रखेगी.
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार सुबह सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बेंच में जस्टिस उदय उमेश ललित के शामिल होने पर सवाल उठाए. इस पर जस्टिस यूयू ललित ने संविधान बेंच से खुद को अलग कर लिया. अब इसके लिए नई बेंच बनेगी.
पांच जजों की पीठ ने गुरुवार को कहा कि वह आज मामले की सुनवाई नहीं करेगी बल्कि सिर्फ इसकी टाइमलाइन तय करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आज हम इस मसले पर सुनवाई नहीं करेंगे, बल्कि इसकी समय सीमा तय करेंगे. इस मामले की सुनवाई अब 29 जनवरी से होना तय किया गया है.
राजीव धवन ने कहा कि वह कोर्ट को यह बताना चाहते हैं कि इस मसले के शुरुआती दौर में 1994 में जस्टिस यूयू ललित अदालत की अवमानना के एक मामले में कल्याण सिंह की तरफ से पेश हुए थे. राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस ललित अयोध्या विवाद से जुड़े क्रिमिनल केस में कल्याण सिंह के वकील के रूप में पेश हुए थे.
उन्होंने कहा, 'मैं लॉर्डशिप के सामने बस यह बात लाना चाहता हूं. हमें इस मसले की सुनवाई में कोई आपत्ति नहीं है. अब यह पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर है. मुझे खेद है कि और मैं ऐसा मसला उठाना नहीं चाहता था.'
इस पर सीजेआई ने कहा कि इसमें खेद जताने की क्या बात है, आपने तो बस तथ्य बताया है. हालांकि, यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि जस्टिस यूयू ललित के पीठ में शामिल होने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन इस तरह का मामला उठाने के बाद जस्टिस यूयू ललित ने खुद को इस मसले से अलग कर लिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस बारे में जानकारी दी.
राजीव धवन ने इसके अलावा संविधान पीठ पर भी सवाल उठा दिया, उन्होंने कहा कि ये मामला पहले 3 जजों की पीठ के पास था लेकिन अचानक 5 जजों की पीठ के सामने मामला गया जिसको लेकर कोई न्यायिक आदेश जारी नहीं किया गया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ का गठन करना चीफ जस्टिस का अधिकार है.
Wednesday, January 2, 2019
सियाचिन में तैनात सैनिक अब नहा सकेंगे
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सियाचिन में तैनात भारतीय सैनिकों को अब नहाने के लिए 90 दिनों का इंतज़ार नहीं करना होगा. सैनिकों को शरीर की सफ़ाई के लिए स्वदेशी निर्मित ऐसे उत्पाद भेजे जाएंगे जिनके इस्तेमाल के लिए पानी ज़रूरी नहीं होगा. सियाचिन में 21 हज़ार 700 फ़ीट की ऊंचाई पर तीन महीने की तैनाती के दौरान सैनिक नहा नहीं पाते हैं. भारतीय सेना सियाचिन ग्लेशियर पर हर समय तीन हज़ार सैनिक तैनात रखती है. यहां पारा शून्य से 60 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है. रणनीतिक रूप से बेहद अहम इस ग्लेशियर की रक्षा पर प्रतिदिन पांच से सात करोड़ रुपए तक ख़र्च होते हैं.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार गायों की सुरक्षा के लिए एक नया शुल्क लगाने पर विचार कर रही है. ये शुल्क 0.5 प्रतिशत तक हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार गौ कल्याण शुल्क लगाने पर विचार कर रही है. कैबिनेट ने मंगलवार को इसे मंज़ूरी दे दी थी. हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में आवारा गायों को लेकर ग्रामीणों की नाराज़गी सामने आई है. कम-से-कम तीन ऐसी घटनाएं हुई हैं जब गायों से परेशान किसानों ने स्कूलों या थानों में गायों को बंद कर दिया हो. आवारा गायें उत्तर प्रदेश में बड़ी समस्या बनती जा रही हैं. ये न सिर्फ़ फसलों को नुक़सान पहुंचा रही हैं बल्कि सड़क हादसों की वजह भी बन रही हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में कामयाब होने वाले छात्रों में हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या लगातार गिर रही है. इस समय लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय सिविल प्रशासनिक अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे 370 छात्रों में से सिर्फ़ 8 ने ही हिंदी माध्यम में सिविल सेवा परीक्षा दी थी.
इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अमरोहा से गिरफ़्तार संदिग्ध चरमपंथी मुफ़्ती सुहैल साल 2009 से ही हमला करने की साज़िश रच रहा था. अख़बार ने एआईए से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि सुहैल ने जांचकर्ताओं को पूछताछ में बताया है कि वो भारत में मुसलमानों के साथ हो रहे अत्याचार से आहत था और साल 2009 से ही हमला करने की योजनाएं बना रहा था. पेशे से इस्लामी शिक्षक 29 वर्षीय मुफ़्ती सुहैल ने जांचकर्ताओं से कहा है कि वो बाबरी मस्जिद विध्वंस से आहत थे और उन्हें लगता है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है. सुहैल को हमला करने की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक वो एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में थे.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार गायों की सुरक्षा के लिए एक नया शुल्क लगाने पर विचार कर रही है. ये शुल्क 0.5 प्रतिशत तक हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार गौ कल्याण शुल्क लगाने पर विचार कर रही है. कैबिनेट ने मंगलवार को इसे मंज़ूरी दे दी थी. हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में आवारा गायों को लेकर ग्रामीणों की नाराज़गी सामने आई है. कम-से-कम तीन ऐसी घटनाएं हुई हैं जब गायों से परेशान किसानों ने स्कूलों या थानों में गायों को बंद कर दिया हो. आवारा गायें उत्तर प्रदेश में बड़ी समस्या बनती जा रही हैं. ये न सिर्फ़ फसलों को नुक़सान पहुंचा रही हैं बल्कि सड़क हादसों की वजह भी बन रही हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में कामयाब होने वाले छात्रों में हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या लगातार गिर रही है. इस समय लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय सिविल प्रशासनिक अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे 370 छात्रों में से सिर्फ़ 8 ने ही हिंदी माध्यम में सिविल सेवा परीक्षा दी थी.
इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अमरोहा से गिरफ़्तार संदिग्ध चरमपंथी मुफ़्ती सुहैल साल 2009 से ही हमला करने की साज़िश रच रहा था. अख़बार ने एआईए से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि सुहैल ने जांचकर्ताओं को पूछताछ में बताया है कि वो भारत में मुसलमानों के साथ हो रहे अत्याचार से आहत था और साल 2009 से ही हमला करने की योजनाएं बना रहा था. पेशे से इस्लामी शिक्षक 29 वर्षीय मुफ़्ती सुहैल ने जांचकर्ताओं से कहा है कि वो बाबरी मस्जिद विध्वंस से आहत थे और उन्हें लगता है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है. सुहैल को हमला करने की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक वो एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में थे.
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